तीसरा दिन ! आज तीसरा दिन था लेकिन तुम्हारा कहीं कुछ अता पता नहीं है!!
सुबह से ही तुम्हारे बारे में सोच सोच कर माथे पर बल पड़े जा रहा है। सबसे ज्यादा डर तो इस बात कोई बात तो नहीं हो गयी.… मन बार बार उड़ कर तुम तक पहुँच जाना चाहता है.। समझ नहीं आ रहा कैसे रोकूँ इसे.… और तुम्हारे ख्यालातों में ही उलझ कर जब कोई रास्ता नज़र न आया तो तुम्हे एक मैसेज कर डाला
"No Calls! No Msg! Is evrything alright?"
तुम्हे मैसेज सेंड तो कर दिया पर फिर मन और छलाँगें लगाने लगा! अजीब अजीब तरह के ख्याल आने लगे। तुमसे इतने समय से बात न कर पाने की व्याकुलता तो थी ही लेकिन मैसेज भेजने के बाद एक और डर बढ़ गया। कहीं कोई और न यह मैसेज पढ़ ले। कहीं मेरी लालसा तुम्हारे लिए कोई मुसीबतर न खडी कर दे।
दोपहर 12 बजे इस मैसेज ने मेरी चिंता और बढ़ा दी। मन पहले से ज्यादा उड़ने लगा। ऑफिस में भी सारा दिन तुम्हारे बारे ही सोचता रहा। सोचता रहा कहीं मेरे मैसेज से तुम्हे किसी दिक्कत का सामना तो नहीं करना पड़ेगा? तुम्हारे ख्यालों में कब दिन बीत गया पता ही नहीं चला।
ऑफिस से निकलते वक़्त फोन की घण्टी बजी! एक बार फिर मन बोला तुम्ही ही हो!!
मैं अपना बंद करता बैग छोड़ फोन की तरफ बढ़ा तो देखा तुम्हारा ही मिस कॉल था। दिल में गीत चलने लगे! मोर नाचने लगे! बदल बरसने लगे! और मैंने तुम्हे फोन मिला दिया। पर फोन पर सुनी देती टर-टर से धीरे धीरे गीत बंद हो गया, मोर के कदम रुक गए, बादलों ने बरसना बंद कर दिया, तुमने फोन नहीं उठाया!!
पहले कभी इस समय तुम्हारा कॉल नहीं आया था! आज आया पर बात न हो सकी। मन एक बार फिर तुम्हारे ही ख्यालों में डूबा चला जा रहा था। घर लौटते वक़्त भी बस तुम्हारी ही तस्वीर आँखों के सामने आ रही थी, तुम्हारी फ़िक्र हो रही थी कि तभी प्रिय का मेसेज आया। तुम्हे प्रिय याद है न? मेरा भाई मेरी बहन मेरा दोस्त मेरा दुश्मन! वो ही प्रिय।
उसका मेसेज जैसे एक तिनके की तरह आया और ख्यालों मैं डूबते रजत को बचा ले गया। जब तुम नही होती तो उससेतुम्हारी उससे बात कर लेता हूँ कभी कभी। थोड़ी टेंसन कम हो जाती है। :P
आखिरकार! आज कॉल तो आया भले ही मिस कॉल!! पर आया तो! कल कॉल भी आएगा और गीत बजेंगे, मोर नाचेंगे और बादल...
09 मार्च 2015
No comments:
Post a Comment