Monday, September 15, 2014

सदर बोले तो खरीदारी में ऑल इन वन

अगर आपको कोई समान पूरे शहर में नहीं मिल रहा है तो आपको जरुरत है शहर के सदर बाजार आने की। ये बाजार गुड़गांव की गगन चुंबी इमारतों से कुछ ही दूर पर है। करीब 65 साल की उम्र का यह बाजार गुड़गांव के बस अड्डे के पास ही है। ये गुडगंव का ऐसा बाजार है जहां आपको सब कुछ मिल जाएगा।

ए से लेकर जेड तक है यहां: सदर बाजार में आपको ए से लेकर जेड तक सब मिल जाएगा। यहां आपको कपड़े, ऐक्सेसरीज़ और गैजेट्स के साथ साथ अच्छा फूड भी मिलेगा। गुडगांव के भविष्य अरोड़ा का कहना है, “मैं यहां हफ्ते-दो हफ्ते में आता रहता हूं। जब भी मुझे कोई भी समान गुड़गांव के मॉलस् में नहीं मिलती तो मैं यहीं आता हूं। यहां सभी टाइप का समान मिल जाता है।” पूरे शहर में सदर बाजार अपनी इसी खास क्वालिटी के लिए काफी फेमस है।

मिलती है खास वैराइअटी:
करीब पांच किलोमीटर से ज्यादा एरिया में फैला सदर बाजार आपको काफी वैराइअटी ऑफर करता है। यहां एक ही चीज की कई दुकानें हैं जो आपको अच्छी-खासी वैराइअटी प्रोवाइड करती हैं। इसके साथ ही बाजार में कई स्ट्रीट वेंडर्स भी हैं। जिनसे आप कई इंट्रस्टिंग और नई ऐक्सेसरीज़ खरीद सकते हैं।

जेब पर नहीं पड़ता असर:
सदर बाजार में ढेर सारी दुकानें हैं। यहां से शोपिंग करने का सबसे बड़ा फायदा है सेविंग्स। यहां आपको अच्छे कपड़े और टेस्टी फूड के लिए अपनी जेब पर खासा जोर नहीं डालना पड़ेगा। बाजार में ढेर सारी दुकानें हैं जहां से आप रेट्स कम्पेयर कर सकते हैं। यहां आपको सभी सामन आपके बजट में मिल जाएगा। सदर बाजार से शोपिंग करने पर आपको एक और बेनफिट भी मिलता है। वे यह कि आप यहां जमकर बार्गिनिंग कर सकते हैं। अगर आप निगोशीएसन में अच्छे हैं तो सदर बाजार आपके लिए एक कूल मार्केट हो सकता है।

सरदार की जलेबी:
बाजार से अंदर आते ही कुछ कदमों की दूरी पर मिलती हैं सरदार की गरमा-गरम जलेबियां। पिछले 6 दशकों से ज्यादा सालों से ये गुड़गांव को अपनी जलेबियां खिलाते आए हैं। ‌‌दुकान पर जलेबियां बनाने वाले भगवान दास करीब 45 सालों से सरदार जी की ही दुकान पर जलेबियां बनाते आए हैं। इसके साथ ही दुकान पर केवल गरमा गरम करारी जलेबियां ही मिलती हैं। बावजूद इसके आपको अपनी बारी के लिए कुछ समय इंतजार करना पड़ सकता है। दुकान पर बनी जलेबियां न केवल गुड़गांव मे फेमस है बल्कि देश के अन्य हिस्सों में भी काफी फेमस है। दुकान के मालिक गुरदीप बताते हैं ‘‘लोग हमारी जलेबियां केरला, बैंगलोर, मुंबई जैसे कई शहरों में ले जाते हैं।” ऐसे में अगर आप सदर बजार जाने की सोच रहे हैं तो सरदार की जलेबियों की मिठास चखना तो बनता ही है।

बाल जी स्वीट्स एंड रेंस्तरा: सदर बाजार के दूसरे छोर पर बना बाल जी स्वीट्स एंड रेस्तरां। ये रेस्तरां भी बाजार की पुरानी दुकानों में से एक है। यहां के छोले भठूरे और ब्रेड पकोड़े लोगों को काफी पसंद हैं। यहां के छोले भठूरों का लाजवाब स्वाद आपको यहां दोबारा आने पर मजबूर कर देगा। दुकान के मालिक बालकृष्ण बताते हैं, “हमारे यहां जो ग्रहाक एक बार आता है, वो दोबारा जरूर आता है। ज्यादातर लोग हमारे यहां ब्रैड पकोडे और छोले भठूरे खाना पसंद करते हैं।” रेस्तरां पर दोपहर व शाम के समय काफी भीड़ हो जाती है। अगर आप मसालेदार व चटपटा खाने के शौकिन हैं तो बालजी आपके लिए एकदम सही जगह है।

साथ हैं ताजा सब्जियां भी:
बाजार के पीछे ही सब्जी मंडी है। जहां से आप फ्रेश सब्जियां ले सकते हैं। मंडी होने कारण आपको यहां काफी कम दाम पर सब्जियां मिल जाएंगीं। 

बुक स्टोर का भी है जलवा: बाजार में कई बुक डिपो हैं। जहां आपको हर तरह का स्टेशनरी का समान मिल जाएगा। मंगला एंड कंपनी के मालिक आशिष का कहना है, “हमारे यहां काफी दूर दूर से स्टूडेंट्स आते हैं। बाजार में सभी तरह के फॉर्म मौजूद हैं। जो यंगस्टर्स को बाजार की ओर काफी अट्रैक्ट करता है।” अगर आप भी किसी फॉर्म या स्टेशनरी समान की तलाश में हैं इधर उधर घुम रहे हैं तो सदर बाजार आपके लिए एक कारगर जगह साबित हो सकती है। 

पूरे वीक रहता है ओपन: अगर आप शोपिंग करने का प्लान बना रहे हैं पर समय की कमी के कारण नहीं जा पा रहे हैं तो सदर बाजार आपके लिए एकदम ठीक बाजार है। आप चाहे कॉलेज गोइंग स्टूडेंट हों या फिर किसी भी प्रोफेशन में आप कभी भी सदर बाजार जा सकते हैं। यह मार्केट पूरे वीक ओपन रहती है। बाजार रोजाना सुबह 09:30 बजे खुल जाता है और रात 09:30 तक अपने ढलान की ओर बढ़ने लगता है।




Saturday, September 6, 2014

फूडिज़ का गुड टाउन अड्डा सेक्टर 29




किसी ने ठीक ही कहा है, इंसान के दिल का रास्ता उसके पेट से होकर गुजरता है और आगर आप भी ऐसे ही किसी के दिल में अपनी जगह बनाना चाहते हैं तो सेक्टर 29 की मार्केट आपके लिए एक दम सही जगह है। यहां आपको एक से एक फूडी अड्डे मिल जाएंगें। मार्किट में इंडियन फूड से लेकर चाइनीज, इटेलियन फूड के साथ आपको कई क्लब और पब्स भी मिल जाएंगे हैं। मार्किट में फूड की बढ़ी रेंज होने के कारण ही इस मार्केट को चटोरों का बाजार भी कहा जाता है। यह मार्किट फूडिज़ में काफी फेमस है। यहां आपको कई तरह का फूड मिलता है।

शाही मेहमान की खातिरदारीः मार्किट में मौजूद 21 गन सेल्यूट के नाम का यह रेस्तरां काफी शाही टाइप का है। यहां पर आप राजा महराजा वाली पूरी फिलींग ले सकते हैं। यह रेस्तरां केवल अपने नॉर्थन इंडियन फूड के लिए ही नहीं बल्कि अपने विंडेज कॉलेक्शन के लिए भी फेमस हैं। रेस्तरां में ही दो विंटेज कार और दो बाइस खड़ी हैं। जो काफी कूल लगती हैं। इसके साथ ही रेस्तरां में कई पूराने कैमरा, टेलिफोन और घड़ियां भी हैं। जो आप रेस्तरां में खाना खाते खाते निहार सकते हैं। रेस्तरां का फूड ठीक-ठाक है। आप यहां अपने पार्टनर के यहां क्वालिटी टाइम स्पेंड कर सकते हैं।

इंपोर्डेट कोरियन फूडः कोरियन फूड के लिए यह रेस्तरां आपके लिए बेस्ट प्लेस है। राजधानी दिल्ली और एनसीआर में अपना लोहा मनवा चुके इस रेस्तरां में आपको इंपोर्टेड मीट का लुत्फ का मौका भी मिलता है। अगर आप यहां किसी के साथ डेट पर जाना चाहते हैं तो यह बेस्ट प्लेस है। एक तो यहां आपको बेस्ट कोरियन फूड मिसचता है, साथ ही आप यहां अपने लिए पर्सनल डानिंग रूम भी बुक कर सकते हैं।

मुगले-ए-आजम की दावतः आगर आप मुगल खाने के शौकिन हैं तो इस जगह से बेहतर आपके लिए कोई भी ऑप्शन नहीं है। यह जगह है मार्किट में बना पिंड बल्लुची। मार्किट में बेस्ट मुगल फूड सर्व करने वाले इस रेस्तरां में आपको आपनी बारी के लिए थोड़ा इंतजार भी करना पड़ सकता है। यमी फूड के साथ साथ आपकी जेब का ख्याल रखने वाले इस रेस्तरां में अक्सर काफी लोग नजर आते हैं। आईपी में पढ़ने वाले, दिपक गहलोत बताते हैं, मुझे यहां का बटर चिकन काफी पसंद हैं। जिसके लिए मैं यहां अपने दोस्तों के साथ कई बार आता रहता हूं।

साउथ इंडियन फूड का तड़काः मार्किट में आपको साउथ इंडियन फूड के लिए ज्यादा इधर उधर दौड़ने की जरूरत नहीं है। मार्किट में बना सागर रतना अपने साउथ इंडियन फूड के लिए काफी पसंद किया जाता है। जहां आप साउथ इंडियन फूड का लुत्फ उठा सकते हैं।
चाइनीज और सी-फूड का मिजाज़ः मार्किट में हर तरह का फूड मौजूद है। सी फूड के लिए आप स्वागत और चाइनीज फूड के लिए यो चाइना व चीन-चीन ट्राई कर सकते हैं। यह तीनों ही अपने फूड के लिए बेस्ट हैं।


स्ट्रीट फूड का देसी अड्डाः अगर आप स्ट्रीट फूड के दिवाने हैं तो आप बिकानेरवाहा जा सकते हैंय़ यहां आप गोलगप्पे चाट के अलावा नार्थ इंडियन फूड भी ट्राई कर सकते हैं। यहां की सबसे अच्छी बात यह हैं कि यह काफी किफायती है। यहां आपकी जेब पर खास असर नहीं पड़ता।

फास्ट फूड का भी इंतजामः मार्किट में फास्ट फूड के लिए कई स्टोर हैं। यहां मैक्डोनल्ड, सब-वे, डोमिनोज़ जैसे कई ब्रैंड मौजूद हैं। जहां पिज्जा, बर्गर फास्ट फूड ट्राई कर सकते हैं। इसके अलावा मार्किट में दो व्रियुरीस हैं। डाउन टाउन और हॉप एन ब्रयु में आपको फ्रेस ड्रिंक्स मिल सकती हैं। साथ ही आपको यहां कॉनटिनेंटल, इटेलियन और थाई फूड भी मिल जाएगा। 

डेटिंग के लिए बेस्टः अगर आप अपने पार्टनर के साथ डेट पर जाना चाहते हैं तो यह मार्किट के एक दम बेस्ट है। यहां ऐसे ढेरों रेंस्तरा हैं जहां आप अपने पार्टनर के साथ क्वालिटी टाइम स्पेंड कर सकते हैं। यहां के कई रेस्तरां में आप अपने लिए प्राइवेट डाइनिंग स्पेस बुक करवा सकते हैं।

मैट्रो की कनेक्टीवीटीः मार्किट आने के लिए आप मैट्रो और अनी गाड़ी दोनों का यूज कर सकते हैं। यहां पहुंचने के लिए आप हुड्डा सिटी सेंटर और ईफ्फो चौक मैट्रो स्टेशन दोनों का य़ूज कर सकते हें। जहां से रिक्शा या ऑटो लेकर मार्किट पहुंच सकते हैं। अगर आप अपनी गाड़ी से मार्किट आना चाहते हैं तो आपको पार्किंग की टेंशन लेने की कोई जरूरत नहीं है। मार्किट में पार्किंग के लिए काफी स्पेस है और सबसे कूल बात यह है कि यहां की पार्किंग बिलकुल फ्री है। 

 फोटो क्रेडिटः अविजीत सिंह (अविग्राफी)

Saturday, August 30, 2014

लॉन्ग ड्राइव, मस्ती और परांठे: मुरथल


दूर तक जाती खुली सड़क, सड़क के दोनों ओर लहलहाते खेत और खेतों के बीच बना एक फर्स्ट क्लास रेंस्तरा। नेचर के करीब बने इस रेंस्तरा का नाम है सुखदेव दा ढ़ाबा। जो आपको किसी भी फाइव स्टार रेंस्तरा से बढिया सर्विस दे सकता है। साथ ही अगर आप अपने अज़ीज़ दोस्तों के साथ एक लंबी सी ड्राइव एंजोय करना चाहते हैं तो मुरथल में बना सुखदेव दा ढाबा आपके लिए एक दम ठीक जगह है। यहां आप लॉन्ग ड्राइव के बाद न केवल लाजवाब परांठों का लुत्फ उठा सकते हैं बल्कि आप यहां शोपिंग भी कर सकते हैं।

ढाबे का देशी खाना : ढाबा अपने देशी मक्खन और परंठो के लिए काफी फेमस है। यहां आपको परंठो के साथ सुखदेव की बनाई दही और ढेर सारा मक्खन मिलेगा। जिसका लाजवाब स्वाद आपको पूरा देशी फील देता है। ढाबे का पूरा मैन्यू वेजेटेरियन है। यहां आप आलू परांठा, आलू प्याज परांठा और पनीर के पराठों के साथ-साथ शाही पनीर और दाल मक्खनी भी ट्राई कर सकते हैं। इसके अलावा ढाबे में साउथ इंडियन, कानटिनेंटल और चाइनिज फुड भी एविलेबल है। साथ ही ढाबे के गेट पर गोल-गप्पे और टिक्की जैसै ज़ायकेदार स्नैक्स भी मौजूद है। जिसका लुत्फ आप सामने हाईवे पर सरपट दौड़ती गाडियों और ठंडी हवाओं के साथ उठा सकते हैं।

कभी भी आओ जाओ : सुखदेव दा ढाबे पर आप कभी आ-जा सकते हैं। आप यहां अर्लि मॉर्निंग से लेट नाइट तक कभी भी जा सकते हैं। नेशनल हाइवे पर होने के कारण ढाबा हफ्ते के सातों दिन चौब्बिसों घंटे खुला रहता है। ज्यादातर स्टूडेंटस और यंगस्टर्स यहां वर्किंग डेस् में ही आते हैं। इसके आलावा दिल्ली और एनसीआर के कई बाईकिंग ग्रुपस भी यहां कई बार यहां रात को काफी भीड़ हो जाती है। तब आपको अपनी बारी के लिए 10 से 15 मीनट इंतजार भी करना पड़ सकता है।

ढाबे में शोपिंग का मज़ा: सुखदेव दा ढाबा में ही कई दुकानें बनी हुई हैं। ढाबे पर शॉपिंग करने का अपना एक अलग मजा है। यहां गारमेंट्स, गिफ्ट्स, एनटीक्स, बुक्स, मुविज़ सीडी और मोबाइल की दुकानें हैं। जहां से आप अपने व अपने दोस्तों के साथ- साथ अपने घर के लिए भी काफी कुछ खरीद सकते हैं। ढाबे में बनी एनटीक्स की दुकान पर आपको काफी कुछ नया देखने को मिलेगा। यहां से आप आपने घर के लिए भी काफी डेकोरेटिव चीजें खरीद सकतें हैं। दूर दूर से आए यंगस्टर्स यहां की गिफ्ट शॉप से भी शॉपिंग करना काफी पसंद करते हैं। ढाबे की गारमेंट्स शोप से आप अपने लिए कुर्ते और ट्रैंडी टी शर्ट ट्राई कर सकते हैं। अपने फ्रेंड्स के लिए आप यहां से काफी कूल गिफ्ट्स भी खरीद सकते हैं।  

लोकेशन : राजधानी दिल्ली से 58 किलोमिटर दूर, लहलहाते खेतों में बना है साखदेव दा ढाबा। ढाबे के आस पास काफी खेत हैं। जो आपको बिलकुल ठेट देशी फिलिंग देता है। ढाबे के सामने ही 50 से 60 गाडियों के पार्किंग की जगह है। जहां आप आपनी गाडी पार्क कर सकते हैं।

सीधा है रास्ता : दिल्ली और सोनीपत से ढाबा 58 किलोमीटर दूर है। यह मेन नेशनल हाइवे एनएच1 पर ही बना है। अगर आप दिल्ली से अमृतसर जा रहे हैं तो यह आपके लेफ्ट में पड़ेगा।


आस पास कई और भी अड्डे :  मुरथल में कई और भी अड्डे जहां आप आपने दोस्तों के साथ इंजोय कर सकते हैं। दिल्ली से जाते समय सुखदेव के ढाबे से करीब 5.7 किलोमीटर पहले जुरासिक पार्क पड़ता है। जहां आप अपने दोस्तों के साथ मौज- मस्ती कर सकते हैं। साथ ही अगर आप सुखदेव के ढाबे से करीब 3.6 किलोमीटर अमृतसर की ओर जाएंगे तो वहां आप हवेली रेस्तरां भी ट्राई कर सकते हैं। इसके अलावा आप मुरथल में हल्दीराम और मैक डोन्लड जैसै ब्रैंण्ड का लुत्फ भी उठा सकते हैं।

Friday, August 29, 2014

लज्जा: इलाहाबाद से दिल्ली का हमसफ़र



आज अपनी बुकशेल्फ साफ करते समय महसूस हुआ कि शेल्फ में रखी हर किताब के साथ मेरी कोई न कोई कहानी जरूर जुड़ी हुई है। सभी के साथ एक अजीब सा रिश्ता बना हुआ है।
यह बात उस समय की है जब मैंने अपनी स्कूलिंग खत्म कर कॉलेज में दाखिला लेने के लिए भाग दौड़ कर रहा था। उन दिनों अक्सर इलाहावाद आना जाना लगा रहता है। एक बार रात में करीब 10 बजे इलाहबाद युनिवर्सिटी का एन्ट्रंस इग्जाम देकर लौटते समय, ट्रेन का प्लेटफॉर्म पर इंतजार कर रहा था। इतने में मेरी नजर प्लेटफॉर्म पर बने बुक स्टोर पर गई। काफी पुराना बुक स्टोर था। हालत भी कुछ ज्यादा ठीक ठाक न थी। अब अकेला इंसान प्लेटफॉर्म पर ट्रेन का इंतजार कर रहा था तो सोचा चलो इसे ही निहार लिया जाए बुकस्टोर के पास पहुंचा तो वहां बस कुछ गिनी-चुनी किताबें हीं थी। दुकानदार साहब भी सुबह के बचे अखबारों को समेट रहे थे। निराशा हुई कि यहां तो कुछ ज्यादा देखने को है ही नहीं। दरासल जेब में पैसे तो इतने थे नहीं की अगर कोई बढ़िया किताब मौजूद हो तो उसे खरीद सकूं तो बस निहारने ही गया पर निराशा ही हाथ लगी।
दुकानदार भाई साहब से पूछा, "कोई किताब है किसी मशहूर लेखक की ..."

"जो है तुम्हारे सामने है भईया, इनमें से कुछ लेना है तो बताओ भईया दिखा देता हूं।" दुकान से जवाब आया

"हहहहमममम.... मुझे तो किताबों की कुछ ज्यादा समझ है नहीं क्या लूं इनमें से"

"भईया मैं क्या बताउं आपको जो लेना है बताओ मैं दिखा देता हूं"

"कुछ ऐसा है आपके पास जिसे मैं दिल्ली पहुंचने तक पढ़ सकूं।" मैंने पूछा

"ऐसी तो मैग्जिन होती हैं, वो तो है नहीं भईया... बस कुछ आठ दस ये ही पूरानी किताबें हैं। इन्हें कोई पूछता नहीं।"

"अच्छा... दिखाओ वो ही दिखओ।"

दुकानदार ने अपनी दुकान की आठ दस किताबें टेबल पर ला कर रख दी। अब मुझे भी नया नया रोग लगा था किताबें पढ़ने का तो इतनी जानकारी कहां की कौन सी किताब लूं।

"भईया रहने दो कोई भी ठीक नहीं लग रही है।" मैंने कहा।

"भईया ज्यादातर लोग प्लेटफॉर्म पर अखबार पढ़ते हैं तो इसलिए ज्यादा किताबें नहीं और फिर स्टेशन के बाहर बाजार है सभी वहीं से किताबें लेते हैं।" दुकानदार ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया।

दुकानदार की बात सुन मैं भी अपना मन सिकोड़ अपने फोन में लग गया। फोन से सर हटा ऊपर उठाया तो मेरी नजर दुकान में पड़ी एक किताब की ओर जा टिकी। गौर से देखा तो मालूम चला कि यह तो वही किताब थी जिसके बारे में अपने स्कूल टिचर्स व घर वालों से काफी सुना था। सुना था इस किताब के साथ कई हंगामें हुए थे। इसकी लेखिका को तो मार डालने तक का फरमान जारी कर दिया गया था। मैंने फॉरन दुकानदार से कहा, भईया जरा वो किताब दिखाना
अरे यह किताब तो दिखाना ही भूल गया था। यह बी काफी पूरानी है कई दिनों से रखी हुई है। बस यही एक ही कॉपी है इसकी....  दुकानदार कहता रहा पर मैं उसकी बातों को अनसुना कर किताब के पन्नों में कुछ तलाशने लगा।
कुछ तो ऐसा मिले जिससे सिद्ध हो सके कि यह वही किताब है जिसके बारे में मैंने सुना है।

मैं पन्नों को पलटता रहा, कुछ ढूंढता रहा... और फिर एक एक कर के किताब से जुड़ी सारी बातें मेरी आंखो के सामने आते गए। मुझे यकिन ही नहीं हो रहा था कि मेरे हाथ मैं वह किताब है जिसके बारे में मैंनें इतना कुछ सुना है। जिसको एक दो दिल्ली में ढ़ूंढने का प्रयास भी किया पर असफल रहा।
मैंने दुकानदार से किताब का दाम पूछा, तो वह किताब को अपने हाथ में ले उसे देखता हुआ बोला, "भईया 80 की है पर आपके लिए 70।"
मैंने तुरंत उसे 50-50 के दो नोट थमाए और किताब ले ली। अब यह किताब मेरी थी।

तसलीमा नसरीन की किताब, "लज्जा" अब मेरे पास भी थी। किताब को पा लेने कि वो खुशी बयान नहॆ की जा सकती। लग रहा था न जाने कौन सा कोई पूराना खोया समान मिल गया था।

तसलीमा नसरीन कि किताब को पढ़ते -पढते इलाहाबाद से दिल्ली का सफर कैसे तय हो गया पता ही नहीं चला। दिल्ली पहूंच कर भी किताब को मैंने छोड़ नहीं। दिन रात मैं इसके साथ लगा रहा और करीब दो दिन में इसे पढ़ डाला।



चोट्टू की कहानी...