Tuesday, September 1, 2015

आइए... बैठ कर रो लेते हैं आज...

जिंदगी की भाग दौड़ में आप कब अपने आपको भूल जाते हैं यह आपको खुद भी नहीं पता चलता है... आओ जरा बैठ लेते जरा रो लेते हैं..... जिंदगी में रोना भी बहुत जरूरी है मेरे यार... यकिन मानिए आप अगर आप दुनिया के साबसे ताकतवर लोगों में से एक हैं और आप रो नहीं सकते हैं तो दुनिया में आपसे कमजोर कोई नहीं है। झूठे हैं वे लोग जो आपको ताकतवर कहते हैं... मैं कहता हूं ताकतवर वो होते हैं जो रो लेते और रोकर आगे बढ़ जाते हैं... जिंदगी में सब रंग हैं... आप खुशी चाहते हैं, सुख चाहते हैं, हांसी चाहते हैं, सदा मुस्कुराते रहना चाहते हैं.... लेकिन शायद ही आपने कभी चाहा होगा कि आप रोएं... दो मिनट... बस दो मिनट लगता है रोने में लेकिन यह दो मिनट कम से कम 6 महीने तक के लिए आपको फ्रैश कर देता है... मैनटली फ्रैश... सर का कोई बोझ हल्का हो जाता है.. लगता है जैसे दिल पर रखा पत्थर हटा दिया हो किसी ने .... भारी सांसे फिर नॉर्मल होने लगती हैं... आप फिर एनर्जाइज हो जाते हैं... रो लीजिए... थोड़ा सा रो लीजिए... आखिरी बार कब रोए थे आप? कब आपने आपनी आंखों को कहा था कि जा आ दिल में गढ़े शब्दों को आसूंओं के जरिए बाहर निकाल दे.... कह दीजिए... आज दिल को बह जाने दीजिए.... यहां नहीं तो बथरूम में रो लिजिए पर अब तो रो लीजिए... कितना भार उठाए घूमेंगे इस दिल पर... कुछ तो भार कम कर दीजिए...

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