आज फिर लौट आया हूं अपने चाहने वालों के कारण... काफी दिनों से शिकायत थी लोगों कि आखिर मेरी और तुम्हारी मुलाकात कहां तक पहुंची ? सपनों की नगर और मीलों की दूरी को क्या हम अंजाम तक पहुंचा पाए या नहीं ... आज से एक बार फिर लौट आया हूं लेकर अपनी कहानी....
कुछ दिनों तक बात नहीं हो पाई थी हमारी.... तुम घर पर थी और घर पर तमाम रिश्तेदार, हमारी कहानी में सबसे बड़ा कोई रोड़ा था तो रिश्तेदारी ही थी.. खैर, इन दिनों बातचीत कम थी.... दिनभर तुम घर के काम से घिरी रहती फुरसत मिलती तो रिश्तेदार पकड़ लेते, उनके मुक्ति मिलती तो तुम्हारी कॉलेज की किताबें, मैं नहीं चाहता था कि तुम्हें बे-वजह परेशान करूं इस लिए जैसे तय हुआ था.. कि इस दो महीने सप्ताह में केवल एक बार बात होगी... की उम्मीद लगाए बैठा था मैं....
लेकिन रोजना सुबह उठते ही तुम्हें ब्लैंक मैसेज भेजना नहीं भूलता था मैं.. शायद मेरा स्वार्थ था यह! सोचता था कि शायद इस मैसेज ही मैं अपनी उपस्थिति दर्ज करवाता रहूंगा... लेकिन मुझे क्या पता था मेरी अनुपस्थिति किसी और की उपस्थिति में तब्दिल हो जाएगी, कोई और मेरी जगह ले लेगा, मेरे रचे सपने से मुझे ही निकाल दिया जाएगा....
कुछ दिनों तक बात नहीं हो पाई थी हमारी.... तुम घर पर थी और घर पर तमाम रिश्तेदार, हमारी कहानी में सबसे बड़ा कोई रोड़ा था तो रिश्तेदारी ही थी.. खैर, इन दिनों बातचीत कम थी.... दिनभर तुम घर के काम से घिरी रहती फुरसत मिलती तो रिश्तेदार पकड़ लेते, उनके मुक्ति मिलती तो तुम्हारी कॉलेज की किताबें, मैं नहीं चाहता था कि तुम्हें बे-वजह परेशान करूं इस लिए जैसे तय हुआ था.. कि इस दो महीने सप्ताह में केवल एक बार बात होगी... की उम्मीद लगाए बैठा था मैं....
लेकिन रोजना सुबह उठते ही तुम्हें ब्लैंक मैसेज भेजना नहीं भूलता था मैं.. शायद मेरा स्वार्थ था यह! सोचता था कि शायद इस मैसेज ही मैं अपनी उपस्थिति दर्ज करवाता रहूंगा... लेकिन मुझे क्या पता था मेरी अनुपस्थिति किसी और की उपस्थिति में तब्दिल हो जाएगी, कोई और मेरी जगह ले लेगा, मेरे रचे सपने से मुझे ही निकाल दिया जाएगा....

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