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Monday, March 9, 2015

इंतज़ार! दूसरा दिन!

होली, होली के दिन कहा था तुमने कि तुम्हे हॉस्पिटल जाना है और शायद बात न हो पायेगी! यह सचेहरा उतर आया था मेरा पर जब तुमने कहा, "समय मिला तो शाम को कॉल करेंगे"
तो दिल में एक बार फिर कोई संगीत बजने लगा था। पर अफ़सोस! आज 8 तारिक है। दूसरा दिन! 48 घण्टों से भी ज्यादा का समय बीत चूका है तुम्हारा कोई अता-पता नहीं है। मुझे फ़िक्र हो रही है आखिर कहाँ हो तुम? सब ठीक तो है?
बार बार तुम्हारा ही ख्याल आ रहा है, बार बार तुम आखों के सामने आ खड़ी हो जाती हो और मन! मन एक बार फिर तुमसे बात करने को मचल उठता है। इसी कश्मकश के बीच ऑफिस में बार बार अपने मोबाइल को जेब से निकाल देख लेता हूँ कहीं तुम्हारा कोई कॉल तो नहीं आया है, कोई मेसेज तो नहीं आया है। कहीं तुमने कॉल करी हो और मुझे पता ही न चला हो, कहीं तुम्हारा मेसेज आया हो और मैं देख ही न पाया होऊं! लेकिन! ऐसा कुछ भी नहीं! न कोई कॉल, न क़ोई मेसेज!!
यार! बड़ा कठिन है ऐसा इंतज़ार... खैर, आशावादी हूँ, सो उम्मीद करे बैठा हूँ!

08 मार्च 2015