Saturday, August 1, 2015

सपना! सच या झूठ है यह सपना....

आज ही मिलने का वादा हुआ था। 11 मार्च 2015 हां 11 मार्च... आज ही के दिन तुम्हारा एग्जाम था और तुम्हारे एग्जाम के लिए ऑफिस से स्पेशल ऑफ लेकर मैं मीलों का सफर तय करने को तैयार हो गया था। अब इंतजार था तो तुम्हारे फोन का... तय हुआ था कि तुम मुझे फोन करोगी और फिर मैं यहां दिल्ली से निकलूंगा...


मैं ऑफ लेकर तुम्हारे फोन कॉल का ही इंतार करत रहा... 8 मार्च को तुम्हें घर लाने के लिए राजी तो कर लिया था पर मुझे क्या मालूम था कि मैं ही तु्म्हारे पास नहीं पहुंच पाऊंगा....

9 और 10 मार्च के वे 42 घंटे कितने भारी थे यह मैं ही जानता था... बार बार मेरा ध्यान बस फोन पर ही लगा हुआ था। एक आश थी कि अब तुम्हारा फोन आएगा... तब तुम्हारा फोन आएगा...

लेकिन आज यह 42 घंटे भी 42 सालों की तरह तिल-तिल कर के बीत गए... न मैं तुम्हारे घर न तुम्हारा कॉल मेरे पास....

पूरे दिन फोन के पास ही बैठा रहा.. कहीं ऐसा न हो कि तुम फोन करो और मैं फोन ही न उठा पाऊं... कभी फोन की बैट्री चैक करता तो कभी फोन का नेटवर्क... क्योंकि मैं नहीं चाहता था कि तुम्हारा फोन आए और हमारी बात न हो पाए....


दो दिनों के लंबे इंतजार के बाद भी तुम्हारा फोन जब नहीं आया तो मैं समझ गया कि मैं एक बार फिर तुम्हारी बातों में फंस गया। काश मैंने उस दिन तुम्हारी बात न मानी होती और कहा दिया होता कि मैं आ रहा हूं। चाहे तुम फोन करो या नहीं.....

पर नहीं मैं तो तुम्हारे उस फोन कॉल के इंतजार मैं बैठा रहा जो आया ही नहीं...


.................................................................................................................................................................




तुम्हें पता है मैंने 9 और 10 दोनों ही रातों को केवल एक ही सपना देखा.... सपने में तुम थी, तुम्हारा कॉलेज था, बाइक थी और मैं था.... नींद में तो सपना देख बहुत खुश हुआ था मैं पर जैसे ही सुबह मेरी आंख खुली में स्तब्ध रह गया... क्योंकि मैं जानता था कि जो सपने मैं देखता हूं वह कभी सच नहीं हुआ करते हैं... समझ नहीं आ रहा था कि क्या करूं... आखिर कैसे तुम मेरे सपनों में आ गई... मैं यह सोच कर परेशान ही था पर मन में ख्याल आया कि ऐसा कुछ नहीं होगा... और एक बार फिर मैं गलती कर बैठा.... बैठ गया दो दिन तक तुम्हारे इंतजार में... सपना सच होने के इंतजार में.... तुम से मिलने के इंतजार में... और यह इंतजार आज तक इंतजार ही है....



11 मार्च 2015




 

No comments:

Post a Comment